Musings
Selected poems by Dr R S Tiwari
प्रेम की
पराकाष्ठा ,
है ईश्वरीय
आस्था ,
चलता
इससे जीवन,
द्वेष से न हो
वास्ता |
आत्म बल
बढ़ाता है,
मद -मोह
घटाता है ,
अंधड़
विद्रूपता का
स्वतः ही थम
जाता है ||
डॉ शिखरेश | 16.1.2025
Δ
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