Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

अस्मिता गणतंत्र की

अस्मिता

गणतंत्र की

दिखानी है,

कीर्ति

सनातन की

फैलानी है,

दिव्य-धरोहर को

सहेजकर

आज,

राष्ट्र हित में

एकता

दिखानी है |

जात-पाँत,ऊँच-नीच

का भेद

मिटाकर,

दलगत वैर-भाव से

अब ऊपर

उठकर,

आम जन-जीवन को

सुगम

बनाना है,

अब घर-घर

गणतंत्र दिवस

मनाना है |

मन,वचन,कर्म से

संकल्प

हमारा ,

शिरोधार्य है

संविधान

हमारा,

सामासिक-संस्कृति

के रंग

बिखेर ,

बने देश अब

अतुलनीय

हमारा |

यहाँ न अब

कोई

भूखा सोए,

बिन दूध न

कोई

बच्चा रोए |

मिशन ‘साक्षरता’

अब

हर घर पहुँचे,

मेंहदी

हर बेटी के

हाथ रचे |

शिक्षा औऱ कौशल के

नव-द्वार

खुलें,

अवसर

रोजगार के नित नए

मिलें |

सीमाओं पर

चौकस

पहरेदारी हो,

विकसित राष्ट्र हेतु ,

सब की

जिम्मेदारी हो |

उद्योगों का भारत

नव-बाज़ार

बने ,

विज्ञान संग

अध्यात्म का

नवाचार बने |

भारत फिर से

विश्व गुरू

बन जाए,

तिरंगा प्यारा

जगत में लहराए |

डॉ शिखरेश | 23.01.2025

Leave a comment