अस्मिता
गणतंत्र की
दिखानी है,
सनातन की
फैलानी है,
दिव्य-धरोहर को
सहेजकर
आज,
राष्ट्र हित में
एकता
दिखानी है |
जात-पाँत,ऊँच-नीच
का भेद
मिटाकर,
दलगत वैर-भाव से
अब ऊपर
उठकर,
आम जन-जीवन को
सुगम
बनाना है,
अब घर-घर
गणतंत्र दिवस
मनाना है |
मन,वचन,कर्म से
संकल्प
हमारा ,
शिरोधार्य है
संविधान
हमारा,
सामासिक-संस्कृति
के रंग
बिखेर ,
बने देश अब
अतुलनीय
हमारा |
यहाँ न अब
कोई
भूखा सोए,
बिन दूध न
कोई
बच्चा रोए |
मिशन ‘साक्षरता’
अब
हर घर पहुँचे,
मेंहदी
हर बेटी के
हाथ रचे |
शिक्षा औऱ कौशल के
नव-द्वार
खुलें,
अवसर
रोजगार के नित नए
मिलें |
सीमाओं पर
चौकस
पहरेदारी हो,
विकसित राष्ट्र हेतु ,
सब की
जिम्मेदारी हो |
उद्योगों का भारत
नव-बाज़ार
बने ,
विज्ञान संग
अध्यात्म का
नवाचार बने |
भारत फिर से
विश्व गुरू
बन जाए,
तिरंगा प्यारा
जगत में लहराए |
डॉ शिखरेश | 23.01.2025

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