Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

आलोक प्रवाह

जो ज़ख्म

दूसरों को

देकर

सोते हैं,

जब भी

जागते हैं,

हर हाल

रोते हैं ,

ये तो

उनका महज

अज्ञान-जनित

भ्रम हैं ,

कर्म -वृक्ष

फलते

फूलते

नहीं हैं |

अकाट्य

होते हैं

कर्मों के

फल,

विधि का

विधान,

आज नहीं

तो कल |

डॉ शिखरेश | 26.01.2025

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