Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

आलोक प्रवाह

जब अस्मिता के

बीज़ से

उपजा नवांकुर

वट-वृक्ष बनता है,

तब स्व से

समष्टि के

सप्त स्वरों को

गुंजायमान करता है |

डॉ शिखरेश | 20.01.2025

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