Musings
Selected poems by Dr R S Tiwari
कोई किंतु- परंतु नहीं,
स्वर्ग यहीं,नरक भी यहीं |
कपाट अंतर के खोलो ,
किए कुकर्मों पर रो लो |
करो अगर तुम पश्चाताप,
न सताए पाप का ताप |
सम-रसता तो स्वीकारो,
मोक्ष यहीं,जरा विचारो |
डॉ शिखरेश | 17.1.2025
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