Musings
Selected poems by Dr R S Tiwari
अभ्युदय
चेतना का ,
समझाता
मर्म
जीवन का,
जागती
सामर्थ्य ,
बंद
होता द्वार
क्रंदन का |
सार-तत्व
खोलता
भेद
सत्य के
मूलाधार का,
जीव,जगत,
माया संसर्ग
और
निःसार का |
डॉ शिखरेश | 6.1.2025
Δ
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