Musings
Selected poems by Dr R S Tiwari
मेरी चाह तो अखंड में बसती,
अनंतिम लालसा कभी न जन्मती,
न सुहाता मुझे टुकड़ों में जीना ,
उड़ान एकाकी प्राप्ति को भरती |
डॉ शिखरेश | 07.02.2025
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