Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

आलोक प्रवाह

अन्यत्र नहीं

अंतर में

झाँको ,

अनुत्तरित

सवालों को

पूछो ,

सारे

जवाब

मिल जाएंगे ,

एकाग्र चित्त

होकर तो

सुनो |

अंतस्तल

तेज़ पुंज

रोशन ,

महके है

उर-भीतर

उपवन,

ज्ञानेन्द्रिय

खोल के तो

देख,

कर ‘स्व’ में

विराट ‘समष्टि’

दर्शन |

डॉ शिखरेश | 2.2.2025

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