Musings
Selected poems by Dr R S Tiwari
प्रेम सदा
एकाकी
जन्म लेता है,
प्रतिध्वनि
पाकर
विस्तार लेता है ।
जब तक
स्वार्थी संसर्ग
न घर करे,
ताउम्र
हीरा जैसा
चमकता है।।
डॉ शिखरेश | 2.1.2025
Δ
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