Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

नव- परिभाषित सदाचरण

संदर्भ

तो

बहुतेरे हैं ,

राज

अनेकों

गहरे हैं,

मत पूछ

किसने

क्या किया?

किस्से

आधे-अधूरे

हैं |

वक़्त ने

की

घेराबंदी,

इंसानों

ने

हदबंदी,

गुलशन

सूखा

बिन पानी,

दौड़

लगाई

जो अंधी |

समझ

आया जब

व्याकरण ,

बदल था

उनका

आचरण,

कुसंग ने

पैर

जमाए ,

नव –

परिभाषित

सदाचरण |

डॉ शिखरेश | 18.1.2025

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