संदर्भ
तो
बहुतेरे हैं ,
राज
अनेकों
गहरे हैं,
मत पूछ
किसने
क्या किया?
किस्से
आधे-अधूरे
हैं |
वक़्त ने
की
घेराबंदी,
इंसानों
ने
हदबंदी,
गुलशन
सूखा
बिन पानी,
दौड़
लगाई
जो अंधी |
समझ
आया जब
व्याकरण ,
बदल था
उनका
आचरण,
कुसंग ने
पैर
जमाए ,
नव –
परिभाषित
सदाचरण |
डॉ शिखरेश | 18.1.2025

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