Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

तुमने??

अनगिनत आशाओं संग जागकर

बाट तुम्हारी ही जोहते रहे ,

तुमने दिए थे जो ग़म के बादल ,

तीरगी उनकी हम चीरते रहे |

डॉ शिखरेश | 10.2.2025

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