Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

आलोक प्रवाह

जब कर्तव्य विमुखता भाने लग

जाती है,

निर्लज्ज जिंदगी तब नीरवता

लाती है ,

अंतर दर्शन के हो जाते तब

द्वार बंद,

आत्म-मुग्धता दुष्कर्मों को

सहलाती है |

डॉ शिखरेश | 18.02.2025

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