Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

आलोक प्रवाह

लौकिक को अलौकिक समझना

भूल है,

पंखुरी के भीतर छुपा यह

शूल है

जब बांधी पट्टी तीसरे नेत्र

पर भी ,

सुखद भविष्य की कामना

निर्मूल है |

डॉ शिखरेश | 19.2.2025

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