Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

आलोक प्रवाह.- Mar 6

अनंत अभिलाषाएं अरु कुंठाएं

जन्म देतीं हैं विकल आशंकाएं,

करतीं हैं नृत्य अविवेकी धुरी पर,

आमंत्रित करतीं हैं बस पीड़ाएं |

डॉ शिखरेश | 6.3.2025

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