Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

आलोक प्रवाह- Mar 11

अविरल,अविराम चलती

रही ज़िन्दगी ,

सहलाती गई हर ग़म सदा

वंदगी ,

बस नेक नीयत संग कर्म का

कौशल

महकाए प्रभु मेहर ,पल-पल

ज़िन्दगी |

डॉ शिखरेश | 11.03.2025

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