Musings
Selected poems by Dr R S Tiwari
समायोजन संग चल कर अब थक चुके हैं,सहन-शक्ति की नई लकीर खींच चुके हैं,तथापि अन्याय की प्रतिध्वनि तक से दूर,हम नई धरा अरु आसमान लिख चुके हैं l
डॉ. शिखरेश l 29.07.2025
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