Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

आलोक प्रवाह :

संकल्पित सतत प्रयास मंज़िल के द्वार खोलता है,
क़ुदरत संग क्रूरता का कहर इंसान झेलता है,
प्रारब्ध संग अद्यतन कर्मफल द्विगुणित होकर ही तो
भाग्य की धुरी बन वसुंधरा पर मानव घूमता है l

डॉ शिखरेश l 6.8.2025

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