Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

अनुगूँज जश्न -ए -आज़ादी की

सशक्त अर्थव्यवस्था में भी
परतंत्रता -सी अनुगूँज
सुनाई देती है,
तभी तो नादान विश्व -शक्ति
स्वतंत्रता को ही
गीदड़ भभकी देती है l

विश्व युद्ध के मुहाने पर
आज खड़ी हैं
परमाणु शक्तियां,
घुटने टेक कर भी
आतंकी दुश्मन दे रहा
नापाक धमकियां l

ऐसे में जश्न -ए -आज़ादी ,
मांगता है
एकता का संकल्प ,
और हो संग -संग
स्वदेशी निर्भरता का
मजबूत विकल्प l

भूले नहीं अभी हम हैं ,
विगत अवरोधों से
उत्पन्न संकट,
उभरे थे तपकर कुंदन -सम ,
हो एकजुट,जूझकर
संकट से विकट l

भूलकर जात-पांत
भेदभाव और
दलगत राजनीति,
उद्यम संग बनाएं
विकसित भारत
की रणनीति l

सत्य, सनातन और
संविधान ही हो
हमारा नारा,
फहरे तिरंगा प्यारा
विश्व पटल पर
जग से न्यारा l

आओ! आओ!!
मिलजुल कर
जश्न -ए -आज़ादी मनाएं ,
शिक्षा अरु संस्कृति संग
विकसित भारत का
संकल्प बार- बार दोहराएं l
जश्न -ए -आज़ादी मनाएं l
जश्न -ए -आज़ादी मनाएं ll

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