Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

आलोक प्रवाह :

दैन्य और निराशा में दिव्यता की तलाश होती है,
कर्म संग परमसत्ता के प्रताप से आस होती है ,
दीन-हीन बन जब इंसान कर्म से
मुँह चुराता है,
नियति संग क़िस्मत उसी के ही विरुद्ध खड़ी होती है l

डॉ शिखरेश l 17.08.2025

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