Musings
Selected poems by Dr R S Tiwari
स्वागत द्वार सजाए खड़ा प्रज्ञान,अंतरिक्ष तक हैआलोकित विज्ञानफ़िर भी कर्तव्य विमुख हो इंसान,सतपथ त्याग बन रहा क्रूर हैवानl
डॉ शिखरेश l 19.08.2025
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