Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

आलोक प्रवाह:

दया अरु दिव्यता का गहरा नाता है ,
अहंकार को ये सब नहीं सुहाता है ,
वासना विषैली जब सर चढ़कर बोले ,
विकृत मन बीता स्वर्णिम कल भुलाता है l

डॉ शिखरेश l 2.09.2025

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