Musings
Selected poems by Dr R S Tiwari
त्रिगुणायत जगत में संयम नव- द्वार खोलता है,चेतना संग मन को क़दम-क़दम पर तोलता है ,साहस और संकल्प जब द्विगुणित रँग बिखेरते,हर्षित अंबर तब सत का भण्डार स्व खोलता है l
डॉ शिखरेश l 15.09.2025
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