Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

आलोक प्रवाह :

सौभाग्य एवं दुर्भाग्य के पहिए कर्म की ज़मी पर दौड़ते हैं,
ज़मी उर्वरा है या मरुस्थल,उसके उत्पादन बता पाते हैं,
ज़िंदगी की पहेली में बस सद्कर्म ही तो असली सहेली है,
जिसके दिखाए सुपथ को अंगीकार कर,सभी मंज़िल पाते हैं l

डॉ शिखरेश l 19.9.2025

Leave a comment