Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

आलोक प्रवाह :

सुसंगति से उपजे रंग अनोखा,
कुसंगति में मिले सदा ही धोखा,
सत्संगति खोलती द्वार मुक्ति के,
रोशन करे अंतर दिव्य झरोखा l

डॉ शिखरेश l 23.09.2025

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