Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

आलोक प्रवाह :

सुषुप्त संतुष्टि और स्वप्निल राग जगाना होगा,
रोकर हंसना और गिरकर फिर से उठना होगा,
सारे प्रतिबंधों बीच संकल्पित- राह पर चलकर ,
अंतर अनुबंधों संग स्वतः गंतव्य पाना होगा l

डॉ शिखरेश l 25.09.2025

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