Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

आलोक प्रवाह :

जश्न-ए-आज़ादी सभी मनाने लगे,
हवन-कुण्ड की आहुति को बुझाने लगे,
जो थी चुकाई कीमत इस दिन के लिए,
अपने स्वार्थ में हो लिप्त,भुलाने लगे l

डॉ शिखरेश l 8.10.2025

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