Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

आलोक प्रवाह :

दीपावली के
उजाले में
दिलों से कालिमा
मिट जाए,
कपट अरु
अहंकार का
गठजोड़ अब
मिट्टी में मिल जाए ,
सारा अहम
और वहम का
द्विगुणित दर्दनाक
खेल है जो,
‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’
हो
जगत भर को
रोशन कर जाए l

डॉ शिखरेश l 19.10.2025

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