Musings
Selected poems by Dr R S Tiwari
शांत मन अरु सदभाव समाधान खोजता है,स्वार्थ और छल-कपट संधि को ही तोड़ता है ,जब इंसान सिर्फ़ आत्ममुग्ध हो जीने लगे,अपने स्वर्णिम भोर पर कालिमा पोतता है l
डॉ शिखरेश l 24.10 2025
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