Musings
Selected poems by Dr R S Tiwari
सिद्धहस्त कोई कर्म से ही होता है ,रिश्तों का मर्म बस यक़ीन में होता है,फ़रेबी मापदंडों की नुमाइश से तोकिसी कर्म -धर्म का मर्म नहीं होता है l
डॉ शिखरेश l 29.10.2025
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