Musings
Selected poems by Dr R S Tiwari
सुसंगत और सार्थक संदर्भ समीचीन होता है,असंगत और अनर्गल प्रलाप तर्कहीन होता है,जब दायित्व बोध में झलक दिव्यता की दिखने लगे,इंसानी चोले में संत स्वरूप नवीन होता है l
डॉ शिखरेश l 13.11.2025
Δ
Leave a comment