Musings
Selected poems by Dr R S Tiwari
किसी भी कला में सिद्धहस्त होना जीवन नहीं है,निराशा में दीप आस का न जलाए, कला नहीं है,कला,कल्याण और संचेतना में निहित समीकरणही सफल जीवन-मंत्र है, मात्र मनोविनोद नहीं है l
डॉ शिखरेश l 23.11.2025
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