Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

आलोक प्रवाह :

दूरदर्शिता को संयम का साथ मिल जाए ,
अंधेरे में एक नई रौशनी मिल जाए,
जब संयम के बीज से हो अंकुरित साधना ,
मुरझाया पौधा भी विशाल वृक्ष बन जाए l

डॉ शिखरेश l 25.11.2025

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