Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

2025

  • संतति अरु संग्रह संग नहीं जाते, स्व-मोह-जाल में ही फंसते जाते, करो कर्म,धरो चित्त परम पिता को , जिसकी हम अनदेखी करते जाते | डॉ शिखरेश | 3.3.2025 Read more

  • Spoil the Symphony…

    Consciously coined jugglery of words Entangles one into the self woven trap , Making the situation, from bad to worse, And also too difficult for one to wrap. Simple,sober,calm and considerate Dealing with any one or anything Resolves the issue, common or special , And brings forth an amicable pivot with no sting. Words ,ways… Read more

  • अवधारणाएं निर्मूल हो जाती हैं, अभिलाषाएं चकनाचूर हो जाती हैं, सब समय-समय की ही बलिहारी है, कर्ण की शक्तियाँ अशक्त हो जाती हैं | डॉ शिखरेश | 1.3.2025 Read more

  • तुम संशय मत पालो, नियति चक्र पहचानो , अनुभव ही जीवन है, इस सच को स्वीकारो | इतिहास बताता है, भूगोल सिखाता है, संस्कृति करे सुवासित, धर्म करे अनुशासित || डॉ शिखरेश | 28.02.2025 Read more

  • संदर्भों के साए में जीवन बीता, पर घट मन का रहा रीते का रीता, किया जब चिंतन और आत्मावलोकन, मन-मंथन से मिला तत्व अमृत सरीखा | पान कर जिसको दिखा एक झरोखा, जिसमें था रहस्य जन्म-मृत्यु का अनोखा || डॉ शिखरेश | 25.02.2025 Read more

  • संकल्प भाव जब प्रबल हो जाए , लोभ-लालच दिग्भ्रमित न कर पाए, गुरू कृपा से हो हर राह रोशन, भ्रम और भय फिर कभी न सताए | डॉ शिखरेश | 25.2.2025 Read more

  • NEVER YIELD AND KNEEL

    Undoubtedly, gone is gone , Done is done, faced you alone. When strife is over for forever . Path is clear, repent not ever. Time has made you too bold To overpower all told or untold . Nothing is immortal except the Soul , All perishes here ,but remains the role . Live for the… Read more

  • परम सत्ता,सत्य और नेक नीयत सत्यम,शिवम ,सुंदरम का योग है | जीव,जगत औऱ माया का खेल जीते जो गणित,वह कर्म योग है || डॉ शिखरेश | 24.2.2025 Read more

  • जब अकथ्य कथनीय हो जाता है , रिश्तों में तब ज़हर घुल जाता है , सहनशीलता का क्षितिज पार कर, बादल विक्षोभ का फट जाता है | डॉ शिखरेश | 23.02.2025 Read more

  • भले संग साथ अनीति भी होती है, अंततः जीत सच्चे मीत की होती है , स्वार्थ की पट्टी बाँध ली जब आँखों पर, कृतज्ञता स्वतः ही पीठ मोड़ लेती है | डॉ शिखरेश | 22.2.2025 Read more