Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

2025

  • अस्मिता गणतंत्र की दिखानी है, कीर्ति सनातन की फैलानी है, दिव्य-धरोहर को सहेजकर आज, राष्ट्र हित में एकता दिखानी है | जात-पाँत,ऊँच-नीच का भेद मिटाकर, दलगत वैर-भाव से अब ऊपर उठकर, आम जन-जीवन को सुगम बनाना है, अब घर-घर गणतंत्र दिवस मनाना है | मन,वचन,कर्म से संकल्प हमारा , शिरोधार्य है संविधान हमारा, सामासिक-संस्कृति के… Read more

  • जो ज़ख्म दूसरों को देकर सोते हैं, जब भी जागते हैं, हर हाल रोते हैं , ये तो उनका महज अज्ञान-जनित भ्रम हैं , कर्म -वृक्ष फलते फूलते नहीं हैं | अकाट्य होते हैं कर्मों के फल, विधि का विधान, आज नहीं तो कल | डॉ शिखरेश | 26.01.2025 Read more

  • सत्य सनातन अंतर्दशन है, संपूर्ण जगत आराधन है , जड़,चेतन से ऊपर उठकर, प्रभु सत्ता का अनुशासन है | डॉ शिखरेश | 27.01.2025 Read more

  • सत्संग-सेवा, पूजा-अर्चना की बिसात ही क्या ? वासना-जनित फरेबी कालिमा सौर मंडल तक से मिटती नहीं | डॉ शिखरेश | 27.01.2025 Read more

  • Enlightened Effusion

    Spiritual practice is an intrinsic ascending journey That opens the doors within doors beyond all agony . The path is so pious ,pure and quite crytal clear That leads to the solar zone of innumerable Suns rare . Dr R S Tewari ‘ Shikhresh’ 29.01.2025 Read more

  • न जाने वक्त कब बदल जाए , घमंड चूर-चूर कर जाए , तटस्थ भाव लिए चलता चल अरु बस तू गुरुमुख हो जाए | डॉ शिखरेश | 30.1.2025 Read more

  • जब कथनी और करनी हो एक नदी,सरोवर और सागर एक जीवन का अलौकिक देवत्व भाव आलोकित हो पहुँचे द्वार एक | डॉ शिखरेश | 31.01.2025 Read more

  • क्या भूलें, क्या याद करें, अरु किससे फ़रियाद करें , नव-पथ पर नई रौशनी , हिय तम से आज़ाद करें | डॉ शिखरेश | 31.01.2025 Read more

  • कष्टों से न घबराओ , तोरण द्वार सजाओ , सुख की परछाईं हैं , संयम संग निभाओ | साधन नहीं ,साधना जगा दे जब चेतना, फिर सुख-दुख से सुदूर, स्वागत न अवमानना | डॉ शिखरेश | 1.2.2025 Read more

  • अन्यत्र नहीं अंतर में झाँको , अनुत्तरित सवालों को पूछो , सारे जवाब मिल जाएंगे , एकाग्र चित्त होकर तो सुनो | अंतस्तल तेज़ पुंज रोशन , महके है उर-भीतर उपवन, ज्ञानेन्द्रिय खोल के तो देख, कर ‘स्व’ में विराट ‘समष्टि’ दर्शन | डॉ शिखरेश | 2.2.2025 Read more