Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

2025

  • करुणा में जीवन बसता है, जीवन भी प्रभु ही रचता है , फिर तू क्यों बौराया फिरता , आक्रोशित रास रचाता है ? डॉ शिखरेश | 8.1.2025 Read more

  • सखा सम कोई संबंध नहीं, स्वार्थ इक-दूजे से कभी नहीं, रहता सदा सुख-दुख का साथी, अवसरवाद जानता ही नहीं | डॉ शिखरेश | 9.1.2025 Read more

  • जिनकी फ़ितरत सिर्फ़ गणित लगाने की , बस अपनी ही भूख-प्यास मिटाने की, जीवन भर वे कब किसी के सगे हुए? करें फ़िक्र जो उसके मरने-जीने की | डॉ शिखरेश | 10.01.2025 Read more

  • जब इष्ट अरु अभीष्ट में तादात्म्य हो, जीवन यात्रा अधर से अध्यात्म हो , उर भीतर अंकुर शांति का फूटता, स्व से समष्टि का अंतर में अधिपत्य हो | डॉ शिखरेश | 11.1.2025 Read more

  • अविरल अविराम है अनंत चेतना , देती हमें जो जागृति अरु ज्योत्सना , फिर ये विह्वलता अरु बेबसी कैसी ? क्या हुई तेज पुंज की अवमानना ?? डॉ शिखरेश | 12.1.2025 Read more

  • देवत्व भाव जाग जाए, अस्मिता पर आँच न आए, तटस्थ भाव में रमो सदा , अंतर रोशन हो जाए | डॉ शिखरेश तिवारी 14.01.2025 Read more

  • Leads to Hamartia..

    Those were the days , Had we rainbow- rays In life ,love and lullaby, Unknown to ‘good-bye.’ Storms turned the table, Lost all that was lovable, Made the itinerary miserable, Leaving in lurch the incredible . Fragrance of lilly flowers, Echo of rivers and towers, Kindlen’t love and ecstacy, Pervades a kind of lunacy. Faith… Read more

  • प्रेम की पराकाष्ठा , है ईश्वरीय आस्था , चलता इससे जीवन, द्वेष से न हो वास्ता | आत्म बल बढ़ाता है, मद -मोह घटाता है , अंधड़ विद्रूपता का स्वतः ही थम जाता है || डॉ शिखरेश | 16.1.2025 Read more

  • कोई किंतु- परंतु नहीं, स्वर्ग यहीं,नरक भी यहीं | कपाट अंतर के खोलो , किए कुकर्मों पर रो लो | करो अगर तुम पश्चाताप, न सताए पाप का ताप | सम-रसता तो स्वीकारो, मोक्ष यहीं,जरा विचारो | डॉ शिखरेश | 17.1.2025 Read more

  • कोई किंतु- परंतु नहीं, स्वर्ग यहीं,नरक भी यहीं | कपाट अंतर के खोलो , किए कुकर्मों पर रो लो | करो अगर तुम पश्चाताप, न सताए पाप का ताप | सम-रसता तो स्वीकारो, मोक्ष यहीं,जरा विचारो | डॉ शिखरेश | 17.1.2025 Read more