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सत-पथ पर चलकर राह आसान बनानी है,त्याग-तपस्या संग दुर्गम मंज़िल पानी है,संकल्पित-साधना से साध्य सुसज्जित मेरा,ज़िंदगी की जंग सप्त स्वरों की रवानी है l डॉ शिखरेश l 25.07.2025 Read more
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शांत भाव से उपजता समन्वय, नहीं जरूरत होती फिर अन्वय , संयम संग बनता नीति निधान , प्राण प्रतिष्ठित मूरत ज्योतिर्मय | डॉ शिखरेश | 13.03.2025 Read more
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अविरल,अविराम चलती रही ज़िन्दगी , सहलाती गई हर ग़म सदा वंदगी , बस नेक नीयत संग कर्म का कौशल महकाए प्रभु मेहर ,पल-पल ज़िन्दगी | डॉ शिखरेश | 11.03.2025 Read more
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संतति के बहशीपन पर जब परिवार अंधा हो जाए, कृष्ण सरीखे लाख समझाएं फिर भी बात न बन पाए, तब तो सिर्फ और सिर्फ महाभारत का बिगुल बजता है , युगों-युगों तलक इतिहास काले पन्नों से रंग जाए | डॉ शिखरेश | 10.3.2025 Read more
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अंततः सब मिट्टी में मिल जाना है , केवल कर्मों का फल रह जाना है, ‘अब’,’तब’ अरु ‘अब न तब’ की तर्ज़ पर ही गाया जाता, जीवन का तराना है | डॉ शिखरेश | 7.3.2025 Read more
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अनंत अभिलाषाएं अरु कुंठाएं जन्म देतीं हैं विकल आशंकाएं, करतीं हैं नृत्य अविवेकी धुरी पर, आमंत्रित करतीं हैं बस पीड़ाएं | डॉ शिखरेश | 6.3.2025 Read more
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संतति अरु संग्रह संग नहीं जाते, स्व-मोह-जाल में ही फंसते जाते, करो कर्म,धरो चित्त परम पिता को , जिसकी हम अनदेखी करते जाते | डॉ शिखरेश | 3.3.2025 Read more
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अवधारणाएं निर्मूल हो जाती हैं, अभिलाषाएं चकनाचूर हो जाती हैं, सब समय-समय की ही बलिहारी है, कर्ण की शक्तियाँ अशक्त हो जाती हैं | डॉ शिखरेश | 1.3.2025 Read more
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तुम संशय मत पालो, नियति चक्र पहचानो , अनुभव ही जीवन है, इस सच को स्वीकारो | इतिहास बताता है, भूगोल सिखाता है, संस्कृति करे सुवासित, धर्म करे अनुशासित || डॉ शिखरेश | 28.02.2025 Read more
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संदर्भों के साए में जीवन बीता, पर घट मन का रहा रीते का रीता, किया जब चिंतन और आत्मावलोकन, मन-मंथन से मिला तत्व अमृत सरीखा | पान कर जिसको दिखा एक झरोखा, जिसमें था रहस्य जन्म-मृत्यु का अनोखा || डॉ शिखरेश | 25.02.2025 Read more
