Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

Hindi

  • विषय विकार करते हमको अस्थिर, मन,बुद्धि, चित्त नहीं रहते स्थिर, यदि हो जाए नियंत्रण इन सब पर, बजे रागिनी सप्त स्वरों की उर भीतर | डॉ शिखरेश | 13.02.2025 Read more

  • ताउम्र….

    प्रेम सदा एकाकी जन्म लेता है, प्रतिध्वनि पाकर विस्तार लेता है । जब तक स्वार्थी संसर्ग न घर करे, ताउम्र हीरा जैसा चमकता है।। डॉ शिखरेश | 2.1.2025 Read more

  • आज मुझे यह ज्ञात हुआ है , खुद को कितने बार ठगा है । उप-चेतन ने चेतन को छल , अंतर- मन में तिमिर भरा है। कितने ही वादे खुद से दोहराए , कितने नूतन हथकंडे अपनाए । हर बार उतर समंदर में इतराए, डूबे ,उतराए , ढूंढ न मोती पाए। डॉ शिखरेश । 4.1.2025 Read more

  • अभ्युदय चेतना का , समझाता मर्म जीवन का, जागती सामर्थ्य , बंद होता द्वार क्रंदन का | सार-तत्व खोलता भेद सत्य के मूलाधार का, जीव,जगत, माया संसर्ग और निःसार का | डॉ शिखरेश | 6.1.2025 Read more

  • हे प्रभु! तूने जो कृपा करी है, अच्छाई अरु बुराई में ठनी है, तेरी मेहर से गंतव्य मिलेगा , बात यही मैंने स्व ध्यान धरी है | डॉ शिखरेश | 7.1.2024 Read more

  • करुणा में जीवन बसता है, जीवन भी प्रभु ही रचता है , फिर तू क्यों बौराया फिरता , आक्रोशित रास रचाता है ? डॉ शिखरेश | 8.1.2025 Read more

  • सखा सम कोई संबंध नहीं, स्वार्थ इक-दूजे से कभी नहीं, रहता सदा सुख-दुख का साथी, अवसरवाद जानता ही नहीं | डॉ शिखरेश | 9.1.2025 Read more

  • जिनकी फ़ितरत सिर्फ़ गणित लगाने की , बस अपनी ही भूख-प्यास मिटाने की, जीवन भर वे कब किसी के सगे हुए? करें फ़िक्र जो उसके मरने-जीने की | डॉ शिखरेश | 10.01.2025 Read more

  • जब इष्ट अरु अभीष्ट में तादात्म्य हो, जीवन यात्रा अधर से अध्यात्म हो , उर भीतर अंकुर शांति का फूटता, स्व से समष्टि का अंतर में अधिपत्य हो | डॉ शिखरेश | 11.1.2025 Read more

  • अविरल अविराम है अनंत चेतना , देती हमें जो जागृति अरु ज्योत्सना , फिर ये विह्वलता अरु बेबसी कैसी ? क्या हुई तेज पुंज की अवमानना ?? डॉ शिखरेश | 12.1.2025 Read more