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देवत्व भाव जाग जाए, अस्मिता पर आँच न आए, तटस्थ भाव में रमो सदा , अंतर रोशन हो जाए | डॉ शिखरेश तिवारी 14.01.2025 Read more
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प्रेम की पराकाष्ठा , है ईश्वरीय आस्था , चलता इससे जीवन, द्वेष से न हो वास्ता | आत्म बल बढ़ाता है, मद -मोह घटाता है , अंधड़ विद्रूपता का स्वतः ही थम जाता है || डॉ शिखरेश | 16.1.2025 Read more
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कोई किंतु- परंतु नहीं, स्वर्ग यहीं,नरक भी यहीं | कपाट अंतर के खोलो , किए कुकर्मों पर रो लो | करो अगर तुम पश्चाताप, न सताए पाप का ताप | सम-रसता तो स्वीकारो, मोक्ष यहीं,जरा विचारो | डॉ शिखरेश | 17.1.2025 Read more
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कोई किंतु- परंतु नहीं, स्वर्ग यहीं,नरक भी यहीं | कपाट अंतर के खोलो , किए कुकर्मों पर रो लो | करो अगर तुम पश्चाताप, न सताए पाप का ताप | सम-रसता तो स्वीकारो, मोक्ष यहीं,जरा विचारो | डॉ शिखरेश | 17.1.2025 Read more
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संदर्भ तो बहुतेरे हैं , राज अनेकों गहरे हैं, मत पूछ किसने क्या किया? किस्से आधे-अधूरे हैं | वक़्त ने की घेराबंदी, इंसानों ने हदबंदी, गुलशन सूखा बिन पानी, दौड़ लगाई जो अंधी | समझ आया जब व्याकरण , बदल था उनका आचरण, कुसंग ने पैर जमाए , नव – परिभाषित सदाचरण | डॉ शिखरेश Read more
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जब अस्मिता के बीज़ से उपजा नवांकुर वट-वृक्ष बनता है, तब स्व से समष्टि के सप्त स्वरों को गुंजायमान करता है | डॉ शिखरेश | 20.01.2025 Read more
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धरोहर दिव्यता की खोलती है द्वार चिदाकाश के, उग जाते हैं तब अनंत सूर्य तेज़-पुंज प्रकाश के , महोत्सव जीव ,जगत और माया का होता जीवंत , प्रगटीकरण अंतर संबंध धरा और आकाश के | डॉ शिखरेश | 21.01.2025 Read more
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अंतर से तम मेरा मिट जाए, भ्रम मेरे-तेरे का मिट जाए , तटस्थ भाव जैसे ही हो जाग्रत , रूह हमारी रोशन हो जाए | डॉ शिखरेश | 24.1.2025 Read more
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अस्मिता गणतंत्र की दिखानी है, कीर्ति सनातन की फैलानी है, दिव्य-धरोहर को सहेजकर आज, राष्ट्र हित में एकता दिखानी है | जात-पाँत,ऊँच-नीच का भेद मिटाकर, दलगत वैर-भाव से अब ऊपर उठकर, आम जन-जीवन को सुगम बनाना है, अब घर-घर गणतंत्र दिवस मनाना है | मन,वचन,कर्म से संकल्प हमारा , शिरोधार्य है संविधान हमारा, सामासिक-संस्कृति के Read more
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सत्संग-सेवा, पूजा-अर्चना की बिसात ही क्या ? वासना-जनित फरेबी कालिमा सौर मंडल तक से मिटती नहीं | डॉ शिखरेश | 27.01.2025 Read more
