Musings
Selected poems by Dr R S Tiwari
स्रोत और मंज़िल के सामंजस्य में सफलता है,भ्रम और भटकाव में तो निहित केवल विफलता है ,मंतव्य और गंतव्य के बीच आनुपातिक योगजीवन- कालिंदी प्रवाह को देता निर्मलता है l
डॉ शिखरेश l 11.11.2025
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