Musings

Selected poems by Dr R S Tiwari

  • अतिवाद अपरिमेय होता है, अविवेक आमंत्रण होता है , हर दुष्कर्म पर कर अट्टहास, घुटन-मरण का वरण होता है | डॉ शिखरेश | 16.2.2025 Read more

  • तुमने??

    अनगिनत आशाओं संग जागकर बाट तुम्हारी ही जोहते रहे , तुमने दिए थे जो ग़म के बादल , तीरगी उनकी हम चीरते रहे | डॉ शिखरेश | 10.2.2025 Read more

  • भ्रामक असत्य इतिहास नहीं बनाता, छल-कपट कभी भी साथ नहीं निभाता, सुमिरन-ध्यान से उपजा अविरल प्रकाश दुरूह जीवन का अंधकार मिटाता | डॉ शिखरेश | 9.2.2025 Read more

  • अंततः जीत यथार्थ की होती है, कूट-रचित तो कहानी होती है , भँवर बीच डटकर खड़ा रहा जो , पतवार पार उसी की होती है | डॉ शिखरेश | 14.02.2025 Read more

  • विषय विकार करते हमको अस्थिर, मन,बुद्धि, चित्त नहीं रहते स्थिर, यदि हो जाए नियंत्रण इन सब पर, बजे रागिनी सप्त स्वरों की उर भीतर | डॉ शिखरेश | 13.02.2025 Read more

  • Resolve to Solve

    Let us take two steps to go for miles To fill the journey with endless smiles . Resolve to solve the issues created by you , And see the wonders of introspection in lieu . Knit the web of truth ,good and beauty , And see the miracle of devotion and duty . Devotion to… Read more

  • ताउम्र….

    प्रेम सदा एकाकी जन्म लेता है, प्रतिध्वनि पाकर विस्तार लेता है । जब तक स्वार्थी संसर्ग न घर करे, ताउम्र हीरा जैसा चमकता है।। डॉ शिखरेश | 2.1.2025 Read more

  • आज मुझे यह ज्ञात हुआ है , खुद को कितने बार ठगा है । उप-चेतन ने चेतन को छल , अंतर- मन में तिमिर भरा है। कितने ही वादे खुद से दोहराए , कितने नूतन हथकंडे अपनाए । हर बार उतर समंदर में इतराए, डूबे ,उतराए , ढूंढ न मोती पाए। डॉ शिखरेश । 4.1.2025 Read more

  • अभ्युदय चेतना का , समझाता मर्म जीवन का, जागती सामर्थ्य , बंद होता द्वार क्रंदन का | सार-तत्व खोलता भेद सत्य के मूलाधार का, जीव,जगत, माया संसर्ग और निःसार का | डॉ शिखरेश | 6.1.2025 Read more

  • हे प्रभु! तूने जो कृपा करी है, अच्छाई अरु बुराई में ठनी है, तेरी मेहर से गंतव्य मिलेगा , बात यही मैंने स्व ध्यान धरी है | डॉ शिखरेश | 7.1.2024 Read more